Poetry

अनुराग या उत्तरदायित्व ।

By Anurag Mishra
उसका मेरे आस पास होना ,कशिश थी या ख्वाब था ,
ये अक्सर हम सोचा करते थे।
वह रोज सुबह मिलने की नजदीकियां और हर  शाम बिछड़ने का दर्द ,

तू है कौन ?

By Anurag Mishra
तू पवन वेग सा बढ़ता जा बाकी सब है वो देख रहा।
तू तीव्र गति से चलता जा ,बाकी सब है वो देख रहा ।।
 
यह विश्व भरा है कांटो से ,तू बन चट्टान संभलता जा।