आज मैने उसे देखा , गुलाबी साड़ी में रोड पर खड़े। वो एकटक रोड़पर खड़े निहार रही थी रास्ते के एक छोर की तरफ, शायद वो किसी का इंतजार कर रही होगी , उसके हाथ में एक बैग भी था , उसने बिना आस्तीन का ब्लाउज पहना था ,दूर से ऐसा लग रहा था शायद उसने बंद गले के साथ ये नई साड़ी खरीदी है , क्योंकि यदि यह पुरानी होती तो क्या मुझे नहीं पता होता ,क्या उसके किसी नए वस्त्र की इतनी गुस्ताखी जो मेरे नयन को ना पहचाने,क्या उसकी तस्वीर मेरे फोन में उस गुमनाम फोल्डर में ना छुपी होती। पर शायद ये जो नई साड़ी है वह मेको पहचानती नहीं , हमारी मुलाकात नहीं हुई ना कभी , बहुत ऐंठ रही होगी ना वो गुलाबी साड़ी मुझे देखकर ,अबे तुझे क्या पता तुझसे कई लाख गुना सुंदर एक तेरे ही रंग का लहंगा आया था जिसने उन खूबसूरत आभूषणों के साथ मिल क्या गजब धाया था ,काश तुझे दिखला पाता ,पर छोड़ मूर्खो से बतियाना छोड़ दिया है मैने,उसके वस्त्रों की गिनती करने की औकात कभी मेरी ना हुई तो तू भी पड़ी होगी किसी कोने में ,बहुत जल्दी बोर होजाएगी तुझसे तो इतना इतरा मत।आज उसके बाल बंधे हुए थे , बहुत प्यारी लग रही थी वो , मैने तो उसे मात्र चंड सेकंड के लिए ही निहारा होगा ,अब एक चलती बस से में क्या ही देख पाता,पता है मुझे बहुत हसी आरही है ये सोच के , की आधा टाइम तो उसका पल्लू सीधा करने में ,और साड़ी संभालने में ही निकल जाएगा ,उसके चारो और बहुत कीचड़ था ,बहुत बड़बड़ कर रही होगी पक्का हाहाहाहा। जो गाड़ी वाले तेजी से उसके बगल से गुजर रहे होंगे कीचड़ उछालते हुए ,बेटा तुम सब उसके मन के गुस्से और मुख से निकली गालियों के शिकार होते होंगे , पर ज्यादा परेशान मात होना तुम सब क्यूंकि उसकी मुख से निकले शब्द वो इसलिए है क्योंकि उसको ना किचकिच नहीं पसंद और अभी ऐसी जगह खड़े होके ,तुम ऐसे निकलोगे तो वो परेशान होगी ही ना , बहुत कोमल ,स्वच्छ स्वभाव है उसका आचरण से नहीं ,अपितु उसके मन से। इसलिए तुम सब परेशान ना होना ,बल्कि उसके मुख से निकले तुम्हारे लिए शब्द ही तुम पर आभार है , क्यूंकि बेटा हर किसी से वो बात नहीं करती । उसकी हरकतों का बखान करते करते ,मुझे वो इसकी बचपन की तस्वीरे दिख गई मेरे फोन में , कितनी प्यारी लग री हैना, उस मुझसे झगड़ते झगड़ते मेरा गुस्सा शांत करते हुए लड़ाई जितने के लिए भेजा था ये उसने मुझे ,वो मैसेजेस पढ़ के आज भी हसी आजाती है मुझे ,ऐसी प्यारी लड़की के लिए तो में हर लड़ाई हार जाऊं,क्यूंकि जीतने से ज्यादा सुख तो इसकी हरकतों और अदाओं को निहारने में है। परन्तु एक सेकंड अचानक से मेरा मन विचलित सा क्यूं होरा है , में शायद कुछ ज्यादा ही भावनाओ में बेह गया , आखिर वो शाम के 6 बजे इस समय वहां अकेली खड़ी कर क्या रही है ,किसका इंतजार कर रही है वो?जब उसका घर कुछ ही दूरी पर है ,तो फिर यहां कैसे पहुंची वो ,हो सकता है किसी परिचित के यहां गई होगी आसपास । पर एक मिनट कोई उसका परिचित उसको भला ऐसे आधे रास्ते में छोड़ के तो कभी नहीं जायेगा । तो क्या वो यहां जान के उतरी है, या कहीं वेसा तो नहीं जैसा में सोच रहा हूं , क्या उसे कोई छोड़ कर गया है , कोई भी हो सकता है ,दोस्त यार भाई बन्धु। पर में इतना सोच ही क्यूं रहा हूं ।एक मिनिट अनुराग ,तेरा मस्तिष्क ये कर क्या रहा है , बस इतनी क्षमता थी तेरी जिसकी डिंगे हाका करता है, बस यही नियंत्रण है तेरा खुदपे , क्या भूल गया वो तेरा उसके सामने ज़लील होना होना। भूल गया तेरे ,परिवार के भावनाओ के समक्ष उसका आचरण । बस एक स्त्री के बाहरी आकर्षण में खोके भूल गया ,उसका तेरे साथ व्यवहार , हा हा जानता हूं अब बोलेगा में उसके बाहरी आकर्षण से मतलब नहीं इश्क़ थी मेरा फलाना फलाना , अब क्या औकात है तेरी आशिकी की करवाली बेइज्जती। मिल गया सुकून कलेजे को , करलिया अपने आत्मसम्मान का दुराचार , जिनको याद कर कर के इतने बखान किए जारा ,क्या किया उसने तेरे सम्मान के साथ याद दिलाऊ या भूल गया । अब उसको रोड पे लेने उसका परिवारजन आए या उसके दोस्त तेरी क्या औकात है भाई ,प्रश्न चिह्न लगाने की चावल से घून जैसे निकालते है ,वैसे ही बिन के फेका गया हेतु ,अबे तेको अपनी इज्जत नहीं कम से कम ,में तेरा हृदय जो इतनी बातें करता तुझ निकम्मे से , कम से कम मेरी ही इज्जत करले। हा माना में कमजोर हूं ,पर कम से कम उनसे तो बेहतर हुना जो तेरे मेसेज और तेरी मौजूदगी को ही ,तखलिया देके निकल लेते है ,और ऐसे अनदेखा करते जैसे जनमांध हो। अब्बे क्या अंदर का सब ईमान मर चुका है तेरा ,कुछ बचा है भी या नहीं ,अबे थोड़ी तो शरम करले। अच्छा सुन भाई रेहनेदे तू ,तुझसे ना होपाएगा यही कर रोज़ , करवाते रेह अपने सम्मान का फालूदा जा तू बैठ के हाहाहाहाहा मुझे क्या , देख ले तेरे हिसाब से अपन तो सोरे आराम से , अरे टेंशन मतले हमेशा के लिए नहीं ,मुझे पता है निपट जाएगा तू और निकल लेगी तेरी ये आत्मा हाहहाहा।चल अब नींद से जाग जा और निकल नौकरी पे,यही बचा है तेरे जीवन में जा कर मजदूरी , और हा याद दिला दू यही नौकरी खैर छोड़ ज्यादा करूंगा तो रोदेगा अब तू ,जा बेटा जा काम धंधे पे ध्यान दे उसकी औकात यही ‘फरेब’ थी तू मत चिंता पाल ,क्यूंकि तुझे भले लगता हो अपनी सूक्ष्म बुद्धिमता से देख कर की भोलेनाथ की आंखे बंद है पर वो बंद आंखो से भी सब देख रहा है और भली भाती जानता है ,की कैसा कैसा कोन है। चल बहुत होगई तेरे सपनों में आकर ये बाते ,अब में चलता हूं , नींद से जाग और ये गुलाबी साड़ी,चौक चौराहों और कंपनी यूनिफॉर्म में रोज़ देखने की तू जो मन गढ़न कहानियां बनाता हे वह सब तेरे स्वप्न है कुछ नहीं होगा ये सब सोच के और लिख के ,वैसे भी उसकी औकात नहीं तेरे मुंह लगने की ,खुदपर काबू पा वास्तविकता में जी तू बेहेक गया था इसलिए जगाने आया था तन और मन दोनों की निद्रा स्तुति से, चलता हूं……

