उसका मेरे आस पास होना ,कशिश थी या ख्वाब था ,
ये अक्सर हम सोचा करते थे।
वह रोज सुबह मिलने की नजदीकियां और हर शाम बिछड़ने का दर्द , यह प्रेम था या एक पल ,ये भी समझा करते थे।।
उसकी नादानियों को झेलना और परेशानियों को समझना आदत थी या मजबूरी इसका अनुभव ना था ।
पर उसकी मुस्कुराहट देखने के लिए कुछ भी कर गुजरने की क्षमता रखना बस इसी वजह ये दिल दुर्बल सा था।।
छोटी सी बात पर उसके चट से रोने की सिसकियां सहमा देती थी।
पर उसे मनाते मनाते उन मस्तियो का होना बहला भी देती थी ।।
पर यह सब अब बीते समय की बात है ।
क्योंंकि हमारी ज़िन्दगी में अब जिम्मेदारियों की सौगात है।।
यह गहन इश्क़ और प्रचंड प्रेम की बाते , जरूर तुम्हे आकर्षित कर देगी।
पर इस रोग के साथ अगर तुम बाकी रिश्तों के प्रति जिम्मेवार ना हुए ,तो ये ज़िन्दगी तुम्हारी ढंग से ले लेगी ।।
दुखद समाचार यही है की प्रेम वेम ,इश्क़ विष्क सब मोह माया है ।
और जो 9 से 6 के जीवन में बच गया हो,बस अब वहीं तो वास्तविकता का साया है ।।
पर जरा एक बात सुनते जाना ,
में यह नहीं कहता कि उसके प्रति तुम्हारा अनुराग होना गलत है।
पर यही तो ज़िन्दगी का दुख हेना भाई , तुम्हारे उत्तरदायित्व ही,अब तुम्हारा जगत है ।।
~ अनुराग मिश्रा 



👏👏👏👏👏
🥰
Chalo avi tk nivandh likh rhe the ab kavitaao m v ruchi le rahe ho😁. .. Anyway fab. Initiation. Keep doing buddy❤
Thank U Dosst 🤗
उत्तम प्रयास।
लिखते रहिये।
🙏💐🙏
Thank you for appreciation 🙂
शुक्रिया 🖤
Suits your name ��
Thanks 🙂
Thank You 🙃
Wow great 👍👍