आत्मनिर्भर भारत – संभावनाएं एवं अवसर 🌄🌾🖥️

जब विषय ही आत्मनिर्भरता का हो ,तब अपनी मातृ भाषा हिन्दी में इस निबंध को लिखना ही असली गौरव होना चाहिए , क्योंंकि अंग्रेजी भाषा का ज्ञान निश्चित ही हमारे कौशल का प्रतीक हो सकता है ,किन्तु हमारी देश की इतनी सारी निजी भाषा जैसे हिन्दी,तमिल,तेलुगु,बंगाली आदि की रक्षा एवम् प्रसार हमारा परम कर्तव्य है, तो अपने देश की भाषा के साथ रखते है आत्मनिर्भर भारत की ओर पहला कदम । 

 तारीख थी २६ जनवरी १९५० , जब भारत देश गणतंत्र बना था । वह अवसर मात्र संविधान के लागू होने या विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के निर्माण तक सीमित नहीं था ,अपितु वह शंखनाद था उन सारी राष्ट्र शक्तियों के समक्ष जो हमारे देश की लाचारी और गरीबी को हमारी कमजोरी समझ रहे थे जिन्हें लगा की भारत वर्ष का भविष्य अंधकार से भरपूर होगा ,पर शायद उनको इस बात का तनिक भी अंदाजा नहीं था ,की भविष्य क्या खेल दिखाएगा। आत्मनिर्भरता का शाब्दिक अर्थ होता है ‘स्वयं पर निर्भर होना ‘ , जब १९६५ में ‘श्री लाल बहादुर शास्त्री देश’ के प्रधानमंत्री बने ,तब वह दौर था जब देश में अनाज की कमी होगई थी ,हम अपने खाद्य आपूर्ति के लिए विदेशी ताकतों जैसे अमरीका और बाकी पश्चिमी देशों पर निर्भर थे ,जो हमारी इस कमजोरी का फायदा अपने राजनैतिक फायदे के लिए उठाते थे ,तब अनाज की कमी के कारण जब देश में खाद्य आपातकाल आया ,तो शास्त्री जी ने सप्ताह में एक दिन उपवास रखने ,का इस देश को विचार दिया और उन्होंने स्वयं भी अपने परिवार समेत उपवास रखा।,और तभी जन्म हुआ “आत्मनिर्भरता” के संकल्प का, उन्होंने हरित क्रांति के माध्यम से देश का पूरा ध्यान कृषि एवं खाद्य अनाजो के ऊपर केंद्रित किया ,गेंहू ,ज्वार,शक्कर आदि जरूरतों की उपज पे जोर दिया ,और ‘ जय जवान जय किसान ‘ के नारे के साथ ,देश को अपनी खाद्य जरूरतों के प्रति आत्मनिर्भर बनाया । पर ये तो शुरुआत मात्र थी आने वाले स्वर्णिम भविष्य की ओर अग्रसर।

“संभावनाएं” ही हम मनुष्यों के लिए ,सफलता की पहली झलक है , क्योंंकि जहां से आशा होती है ,वहीं पे मंजिल सुगम मिलती है । भारत के पास आत्मनिर्भरता में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं है ,जिनमें सर्वप्रथम अनाज जरूरतों में हमने शुरुआत करी। उसी प्रकार जो सबसे पहला लक्ष्य होने चाहिए वह है , फौज के यंत्रों ,हवाई एवं नीर के युद्धक जहाज और हथियारों में ,देश की सुरक्षा के लिए फौज का योगदान किसी परिचय का मोहताज नहीं,विदेशी हथियारों के चक्कर में भारत को हर बार ,आंतरिक सुरक्षा का खतरा आ सकता है ,क्योंंकि जिससे भी हम खुफिया यंत्र या हथियार लेंगे ,उसकी गोपनीयता रखना बहुत कठिन है , हमारी संस्थाएं जिन्होंने तेजस जैसे युद्धक एवम् मारक हथियार बनाए ,उनके पास निश्चित ही अपार कौशल है हमें इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की और ले जाने के लिए। द्वितीय लक्ष्य होना चाहिए , ‘उत्पादन क्षेत्र’ (मैन्युफैक्चरिंग) की तरफ ,चीन के सस्ते और कमजोर सामानों में हमारा बाजार बहुत बुरी तरह से फस चुका है ,हमें अपने उत्पादन क्षेत्र को बढ़ावा देना पड़ेगा वो भी पवन वेग की गति से , हम में वो पूरी क्षमता है कि हम अपने दैनिक जरूरतों के यंत्रों और सामानों का उत्पादन स्वयं कर सके और विदेशी हमारे बाजार और अर्थव्यवस्था की बागडोर ना संभाले। जो तृतीय मुख्य बिंदु है ,आज का भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा ‘ स्मार्टफोन ‘ इस्तमाल करने वाला देश है ,किन्तु  अफसोस की बात यह इनमें ,अधिकतम प्रतिशत मोबाइल विदेशी कंपनियों के है हम जानते है की ,टेक्नोलॉजी और आधुनिकीकरण के क्षेत्र में जैसे माइक्रो चिप,प्रोसेसर,मोबाइल,ऑप्टिकल फाइबर आदि क्षेत्र में हम थोड़ा सा पीछे रह गए है किन्तु जहां चाह है वहीं राह है ,हमें अपनी आविष्कारक क्षमताओं का इस्तेमाल करके सुगम प्रयास करना होगा , इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता अधिक है ,क्युकी आज के युग में ,आधुनिकता ही आपको अव्वल बनाएग ।

‘अवसर’ को सफलता में परिवर्तित करना ही हमारा परम लक्ष्य होना चाहिए , अभी हाल ही में जब कोरोना महामारी में हमारे स्वास्थ्य विभाग को दिक्कतों का सामना करना पड़ा ,तब देश के उत्पादन क्षेत्रों ने ,बड़ी मात्रा में पी°पी°ई जांच किट बना के यह साबित कर दिया कि आपदा ही अवसर को बनाने का सही समय होता है । हमारे प्रधानमंत्री जी ने बीते वर्ष जब आत्मनिर्भर भारत योजनाओं की शुरुआत करी ,तब उन्होंने मुख्यतः पांच बिंदुओं पर जोर देने की बात कही ” अर्थव्यवस्था,आधारभूत संरचना,प्रणाली ,जनसांख्यिकी और मांग ” । यही वो पांच स्तंभ है जिनपर कार्य करना हमारे ,आत्मनिर्भरता के संकल्प को मजबूत करेगा । वैक्सीन और दवाई उत्पादन के क्षेत्र में हम पहले ही विश्व में अग्रज है , किन्तु यही सही काल है कि हम सभी प्रकार के स्वास्थ्य जरूरतों में आत्मनिर्भर हो जाएं । मेक इन इंडिया जैसे सुगम प्रयासों के कारण , हमें अपार अवसर मिला है भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ।

परिवर्तन ही सृष्टि का नियम है ,यह हम भलि भांति जानते है ,किन्तु यह परिवर्तन हम नागरिकों से ही शुरू होता है ,क्योंंकि आप ही वह समाज की इकाई है जो अपने देश के सामानों की खरीदी ,निजी कौशल का विकास और सुगम विचारो से आत्मनिर्भर भारत की नीव रखेंगे।  क्योंंकि इतिहास साक्षी है , की भारत वर्ष के संस्कार ,मात्र कोई प्रथा नहीं अपितु पूर्ण कथा है विश्व की प्राचीनतम सभ्यता और उनके आधुनिक विकास की ,जो स्वप्न आत्मनिर्भरता के विचार के जनक शास्त्रीजी ने देखा है ,उसको पूरा करना हमारे प्रयास पे निर्भर है और हम उनके विचारों के  उत्तराधिकारी है । हमें अपने देश में निर्मित सामानों की खरीद और उनके प्रोत्साहन पे ध्यान देना चाहिए । हमें अनुसंधान और विकास (आर°& डी°) के क्षेत्र में विशेष ध्यान देना होगा ,क्योंंकि वह क्षेत्र ही ऐसा क्षेत्र है ,जहां हम अच्छा नहीं कर पा रहे है। आत्मनिर्भर बनने की शुरुआत हमारे स्वयं के स्वावलंबी बनने से होगी । इसी कथन के साथ में इस निबंध का अंत करना चाहूंगा ,किन्तु में जानता हूं और उम्मीद रखता हूं कि स्वावलंबन और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की तो अभी बस शुरुआत है ।

जय हिन्द 🇮🇳

~ अनुराग मिश्रा

20 thoughts on “आत्मनिर्भर भारत – संभावनाएं एवं अवसर 🌄🌾🖥️”

  1. उत्तम लेखन। हिंदी को महत्व देंकर आपने सराहनीय कार्य किया है।

  2. बहुत धन्यवाद इन शब्दों के लिए ।
    प्रेरणा आप भी है जो धर्म की दिशा में सकारात्मक काम कर रही है,विदुषी जी 🙏

  3. हमें फिर से याद दिलाने के लिए धन्यवाद कि आपदा को अवसर में बदलना हमारे खून में है…Great content keep going ��

  4. बहुत सुंदर लेख। आत्मनिर्भरता की ओर ध्यान ले जाने वाला सूचनाप्रद लेख। लिखते रहिए शुभकामनाएं।

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